एक अनजानी
एक लड़की थी अनजानी सी,
दीवानी सी मस्तानी सी.
ये दिल जो उसपे मरता था,
आंहे उसकी भरता था.
वो मन मे मेरे बस्ती थी,
वो दिल मे मेरे रहती थी.
ना कटते थे दिन,
ना होती थी रात,
रोता था दिल,
जब ना होती वो मेरे पास.
दिल में है बात,
जो उससे कहना चाहूँ.
पर चांहु तो भी उससे,
मैं अब कुछ ना बोल पाऊं.
जाने कौन-सा है वो जंहा,
जाने कैसे रहती वो वँहा.
ये दिल जाने क्यों आज भी,
याद में उसकी रोता है.
बोहोत भुलाना चाहा उसको,
पर याद में उसकी रोता रहा.
याद में उसकी रोता रहा...
एक लड़की थी अनजानी सी,
दीवानी सी मस्तानी सी....
चली गयी मुझे छोड़ कर,
कही दूर वो मुझ से रूठ कर..
....
..
कही दूर वो मुझसे रूठ कर.....
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